♥ Love Shayari ♥

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शायरी भी एक खेल है
शतरंज का...
जिसमे लफ़्ज़ों के मोहरे
मात दिया करते हैं एहसासों को...

झुका सर भोले के चरणों मे...
वो तेरा दुखडा दूर भगा देंगे... 
जला शिव की ज्योत अपने मन में 
वो तेरा भाग्य जगा देंगे...
हर हर महादेव

दिल अकसर ग़मगीन रहता है,

मशवरा चाहिये कि,

दिल बदल डालें या 
दिल में रहने वाले !

वफ़ा सबको मिली दुनिया 
          में हमारे सिवा
 हमें जब भी प्यार हुआ बेकदरों
                 से हुआ

मिजाज हमारा भी है
कुछ कुछ 
समन्दर के पानी जैसा..
.
.
खारे हैं..मगर खरे हैं..

फुर्सत मिले तो कभी बैठ कर सोचना, 
तुम भी मेरे अपने हो या सिर्फ हम ही तुम्हारे है !!

कुछ राज बने ही नहीं होते हैं बांटने के लिए..... 

कुछ सफ़र होते हैं सिर्फ़ तन्हा काटने के लिए!!

कहाँ खो गए हैं आप ,
या सो गए हैं आप,
बेवफा तो लगते नहीं थे पहले,
क्या ? अब हो गए हैं आप.

तेरी धड़कन ही ज़िंदगी का किस्सा है मेरा,...
तू ज़िंदगी का एक अहम् हिस्सा है मेरा,...
मेरी मोहब्बत तुझसे, सिर्फ़ लफ्जों की नहीं है,
तेरी रूह से रूह तक का रिश्ता है मेरा....

आज समझ मे आया मुझको.................

कितना तरसा होगा तू 
मेरे एक इकरार को
कितने बरस सम्भाला तूने
मेरे उस पैगाम को

आज समझ मे आया मुझको.................

कितना तू दीवाना था
कितना तू बर्बाद रहा
कितनी शिद्दत से चाहा तूने
मुझ अल्हड नादान को

आज समझ मे आया मुझको.................

कितने ख्याब सजाये तूने
जो चढे नहीं परवान को
मंजूर नहीं था साथ हमारा
उस अल्लाह उस भगवान को

चेहरे और पोशाक़ से बस आँकती है दुनिया ..... 

रूह में उतरकर कब झाँकती है दुनिया !!!

इतना भी आसान नहीं होता अपने ढंग से ज़िंदगी जी पाना...

बहुतों को खटकने लगते हैं, जब हम खुद को जीने लगते हैं...

मैं अन्धेरा हूं तो अफसोस क्यूं करूं..!
मुझे गुरूर है रोशनी का वजूद मुझसे है..!!

सुबह है रूखी रूखी,

शाम है तन्हा तन्हा,

मोहब्बत करने वालों का

यही अंजाम होता है.

तुम्हारे पास "यकीन" का कोई इक्का हो तो बतलाना.... 

हमारे "भरोसे" के तो सारे पत्ते जोकर निकले!!! 

शक तो था मोहब्बत में नुक्सान होगा...

पर सारा हमारा होगा, ये मालूम न था …

सारी उम्र आँखों में एक सपना याद रहा , 
सदियाँ बीत गयी पर वो लम्हा याद रहा ,
जाने क्या बात थी उसमें और मुझ में,
सारी महफ़िल भूल गए बस वही एक चेहरा याद रहा |

माना कि बरगद और पीपल जैसे विशाल हम नही... 

पर गमलों मे उगने वाली तुलसी भी किसी से कम नहीं!!

कब उनकी पलकों से इज़हार होगा,
दिल के किसी कोने में हमारे लिए प्यार होगा,
गुज़र रही है हर रात उनकी याद में,
कभी तो उनको भी हमारा इंतज़ार होगा।

हम भी मुस्कुराते थे कभी,
बेपरवाह अंदाज़ में.... 

देखा है खुद को आज, 
एक पुरानी तस्वीर में !!!

ख़ुशी जल्दी में थी रुकी नहीं,

ग़म फुरसत में थे - ठहर गए...!

तलब उठती है बार-बार तेरे दीदार की,

ना जाने देखते देखते कब तुम लत बन गए

कठपुतली के दर्द को..भला किसने जाना है.

डोर नचाती है,....खुश होता जमाना है.....

"उम्र" ना पूछो
"इश्क़" करने वालों की हुज़ूर.
"मिजाज़-ए-आशिक़ी"
रखने वाले "जवां" ही रहते हैं.

कुछ अनकहे लफ़्ज़........ 
बहुत शोर करते हैं रिश्ते टूटने से पहले...... 
कभी शिकायत... 
कभी झगड़ा.. 
कभी रुठना... 
कभी मनाना..... 
कभी कोई गीत.. 
कभी कोई गजल.. 
कभी कोई शेर.... 
कभी कोई शायरी........ 
पर बेहिसाब लापरवाहियां उन्हें फिर अहिस्ता अहिस्ता खामोश ही कर देती है......... 
हमेशा के लिए.....
फिर न कोई शिकायत बाकी रहती है...... 
न कोई आवाज....... 
मीलों तक फैली रहती है तो...... 
सिर्फ़ एक तल्ख खामोशी !!!!!!

मेरी यादो मे तुम हो, या मुझ मे ही तुम हो,
मेरे खयालो मे तुम हो, या मेरा खयाल ही तुम हो,
दिल मेरा धडक के पूछे, बार बार एक ही बात,
मेरी जान मे तुम हो, या मेरी जान ही तुम हो।

जब कभी टूट कर बिखरो तो बताना हमको,
हम तुम्हें रेत के जर्रों से भी चुन सकते हैं।

क्या हुआ अगर जिंदगी में हम तन्हा है ???
लेकिन इतनी अहमियत तो
दोस्तो में बना ही ली है कि...
मेला लग जायेगा उस दिन शमशान में,
जिस दिनमैँचला जाँऊगा आसमान में!!

तौहीन न करना कभी कह कर”कड़वा” शराब को…
किसी ग़मजदा से पूछियेगा इसमें कितनी मिठास है !

सब सुख दुःख निज कर्म से उपजै
ईश्वर को देते दोष, मानव कभी ना समझै

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