♥ Love Shayari ♥

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तुम हैरान कर दो... हाल पूछ कर मेरा 
बता के सब ख़ैरियत...मैं भी कमाल कर दूँ..!

नब्ज टटोलते ही हकीमों ने कहा,

साहब, इसने तो इश्क़ पी रखा है।

गैर मुकम्मल सी ज़िन्दगी, वक्त की बेतहाशा रफ्तार.......

रात इकाई, नींद दहाई, ख्वाब सैंकड़ा और दर्द हज़ार....

तेरा ख्याल दिल से जाए तो 
कुछ और काम करूं......
दिल ..दिमाग सब पर तेरा कब्ज़ा है 
अब 
और बता क्या तेरे नाम करूं......

कुछ इस तरहा से सौदा  हुआ वक़्त और मेरे दरमियाँ 

तजुर्बे दे गया वो ...... मेरी नादानियाँ ले गया।

तेरी चुप्पी अगर तेरी कोई मज़बूरी है;

तो रहने दे इश्क़ कौन सा ज़रूरी है।..

दिन तबाही के अब नज़दीक आने लगे हैं... 

मुझे देख कर वो कुछ मुस्कुराने से  लगे हैं!!!

कोई योगी आए बेवफाओ के शहर मे भी ........

ख्वाहिशो के कत्लखाने वहाँ भी बंद करवाने है !!

एक लम्हे में पूरी ज़िन्दगी जी के आया हूँ..
आज सुबह उनके साथ  चाय पी के आया हूँ..

कश्ती के मुसाफिर ने समन्दर नहीं देखा,
आँखों को देखा पर दिल मे उतर कर नहीं देखा,
पत्थर समझते है मेरे चाहने वाले मुझे,
हम तो मोम है किसी ने छूकर नहीं देखा।

एक चाहत है तुम्हारे साथ जीने की
वरना पता तो हमे भी है मरना अकेले ही है

हर ईद पे रूठ जाती हो....??
अब बताओ ईद मनाऊँ या तुम्हे...!!

अगर तुमसे कोई पूछे बताओ ज़िन्दगी क्या है,
हथेली पर जरा सी राख़ रखना और उड़ा देना।

अखबार के किसी पन्ने पर तुम्हारा जिक्र तक नहीं..
लोग यूँ हीं कहतें हैं, दुनियाभर की ख़बरें आतीं हैं इसमें..।।

दोहरा किरदार जी नहीं पाता हूँ..... 
इसलिए अक्सर तन्हा नज़र आता हूँ!!! 

सख़्त हाथों से भी, छूट जाती हैं कभी ऊँगलियाँ.
रिश्ते ज़ोर से नहीं, तमीज़ से थामे जाते हैं..!!

इक दिन तू आ के मेरी मन्नत की लाज रख ले
कब से  उजाड़ता हूँ महफ़िल सजा सजा के

तेरी ख़ुश्बू का पता करती है 
मुझ पे एहसान हवा करती है 

अब्र बरसते तो इनायत उस की 
शाख़ तो सिर्फ़ दुआ करती है 

शब की तन्हाई में अब तो अक्सर
गुफ़्तुगू तुझ से रहा करती है 

ज़िंदगी मेरी थी लेकिन अब तो 
तेरे कहने में रहा करती है

याद आते है तो ज़रा खो लेते हैं...

आँसू आँखो मे उतर आऐ तो ज़रा रो लेते हैं

नींद आँखो मे आती नहीं लेकीन..

आप ख्वाबो में आऐं यही सोच कर सो लेते हैं

दोषी तुम ही नहीं हो पूरी तरह से
तेरे गुनाह में रजामंदी मेरी भी थी

जब लगा था खँजर तो इतना दर्द ना हुआ,

जख्म का एहसास तो तब हुआ जब चलाने वाले पे नजर पड़ी!

हिचकियां मेरी गवाह हैं

नींद उसकी भी तबाह है

अजीब ही नज़ारा है इस बदलती दुनिया का

लोग सब कुछ बटोरते हैं खाली हाथ जाने को

जख्म कहां कहां से मिले है, छोड़ इन बातों को,
जिंदगी तु तो ये बता, सफर कितना बाकी है।

दर्जी भी सिल देता है जेब बायीं ओर...

वैसे ही क्या कम थे ये बोझ दिल पर !! 

हक़ीक़त जान लो जुदा होने से पहले, 
मेरी सुन लो अपनी सुनाने से पहले, 
ये सोच लेना भूलने से पहले, 
बहुत रोई हैं ये आँखें मुस्कुराने से पहले.

दिलों में रहता हूँ धड़कने थमा देता हूँ,
मैं इश्क़ हूँ, वजूद की धज्जियां उड़ा देता हूँ...

जिंदगी है जनाब..... 

  उलझोगे नहीं.... 
           तो सुलझोगे कैसे...

  और बिखरोगे नहीं.... 
            तो निखरोगे कैसे....

तेरा नाम ही ये दिल रटता है ,
ना जाने तुम पे ये दिल क्यू मरता है ,
नशा है तेरे प्यार का इतना ,
कि तेरी ही याद में ये दिन कटता है।

तेरी जुदाई भी हमें प्यार करती है,
तेरी याद बहुत बेकरार करती है,
वह दिन जो तेरे साथ गुज़ारे थे,
नज़रें तलाश उनको बार-बार करती हैं !!

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