♥ Love Shayari ♥

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दिल में प्यार का आगाज हुआ करता है,
बातें करने का अंदाज हुआ करता है,
जब तक दिल को ठोकर नहीं लगती,
सबको अपने प्यार पर नाज हुआ करता है

उड़ जायेंगे तस्वीरों से रंगो की तरह हम,
वक़्त की टहनी पर हैं परिंदो की तरह हम।

मुख़्तसर हुए पहले गुफ़्तगू के सिलसिले,
फिर खामोशी रफ्ता-रफ्ता सारे ताल्लुक निगल गई...!

नारी त्याग की मूरत है, तो,
पुरुष संघर्ष की सुरत है,

कैसे कहूँ, महान किसी को
दोनों को एक दूसरे की जरूरत है...

गैरों_का हाथ_पकड़कर  चलना नहीं सीखा,
बहुत_कुछ सीखा लेकिन बदलना नहीं_सीखा..!

नशा था उनके प्यार का , जिसमें हम खो गए ,
उन्हें भी पता नहीं चला कि कब हम उनके हो गए।

जिन्हें फुर्सत नहीं मिलती.....ज़रा सा याद करने की।....

उन्हें कह दो..... हम उनकी याद में फुर्सत से बैठे हैं!.....

कुछ कहानियाँ अक्सर अधूरी रह जाती है
कभी पन्ने कम प़ड़ जाते है तो कभी स्याही सूख जाती है........!!!!

चाय दूसरी ऐसी चीज है जिससे आँखे खुलती हैं ;

धोखा अभी भी पहले नम्बर पर है.

क्यों मरते हो बेवफा सनम के लिए….
एक कद जगह भी नहीं मिलेंगे दफ़न के लिए…
मरना है तो हिन्द ये वतन के लिए मरो
हसीना भी दुपट्टा उतार देगी तुम्हारे कफ़न के लिए

अगर एहसास बयां हो जाते लफ्जों से,

तो फिर कौन करता तारीफ खामोशियों की।

जिसे हम सबसे ज्यादा चाहते हैं

वही अक्सर दिल दुखाया करते हैं

रोज था उसका नाम मेरे अफसाने में,

थी उसकी तस्वीर मेरे दिल के आसियाने में,

मांगी थी खुदा से दुआ जिसकी ख़ुशी के लिए,

खुशहाली भी मिलती थी उसे मुझे रुलाने में

दुआ का रंग नहीं होता

मगर ये रंग लाती जरूर है

मेरी यादो मे तुम हो, या मुझ मे ही तुम हो,
मेरे खयालो मे तुम हो, या मेरा खयाल ही तुम हो,
दिल मेरा धडक के पूछे, बार बार एक ही बात,
मेरी जान मे तुम हो, या मेरी जान ही तुम हो।

दिल किसी से तब ही लगाना जब दिलों को पढ़ना सीख लो;
वरना हर एक चेहरे की फितरत में ईमानदारी नहीं होती

क़ब्रों में नहीं, हमें किताबों में उतारो,
फ़िलहाल ज़िन्दा हैं हम लोग,
सिर्फ़ मोहब्बत की कहानी में मरे हैं,

यू निगाहों से निगाहे न मिलाओ,,,
जरा सी शरारत हो गई तो  महोब्बत हो जाएगी

मिजाज़-ए-इश्क .... होम्योपेथिक  है उनका ....

मुद्दतो  से  बस ....  मीठी  गोलियाँ दिए  जा  रहे  हैं...

ख्वाब सा था साथ तुम्हारा
ख्वाब बन के रह गया...!

आपको मुफ़्त में जो मिल गये हम,
आप क़दर ना करें ये आपका हक़ बनता है….....

एक चाहत है तुम्हारे साथ जीने की
वरना पता तो हमे भी है मरना अकेले ही है

कभी कभी मेरी खामोशी को भी समझ लिया करो,

रोज रोज लिखने का दिल नहीं होता

शायद किसी लकीर में मैं 
           भी मिल जाऊ 

 मुझे कुछ क़रीब से देखने दे
           ना हथेली तेरी

अब तो हर बात याद रहती है

ग़ालिबन मैं किसी को भूल गया

बचत करने की जिंदगी ने आदत सी डाल दी है.... 

दर्द अपना मैं अब कम ही बांटता हूँ!!

कुछ और नही पल भर के लिए हवा ही बना दे, 

कसम से सिर्फ तुम्हे ‘;छु’; कर लौट आएंगे..!

रंगों से सीखा,,

गर निखरना है तो बिखरना ही पड़ता है.।

दर्जी भी सिल देता है जेब बायीं ओर...

वैसे ही क्या कम थे ये बोझ दिल पर !! 

दिल अकसर ग़मगीन रहता है,

मशवरा चाहिये कि,

दिल बदल डालें या 
दिल में रहने वाले !

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