♥ Love Shayari ♥

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कभी कभी मेरी खामोशी को भी समझ लिया करो,

रोज रोज लिखने का दिल नहीं होता

तु दिल से ना जाये तो मैं क्‍या करू,
तु ख्‍यालों से ना जाये तो मैं क्‍या करू,
कहते है ख्‍वावों में होगी मुलाकात उनसे,
पर नींद न आये तो मैं क्‍या करू। 💕

जो अब तक ना खौला, वो खून नहीं पानी है,
जो देश के काम ना आये, वो बेकार जवानी है

पलकों को जब-जब आपने झुकाया है,
बस एक ही ख्याल दिल में आया है,
कि जिस खुदा ने तुम्हें बनाया है,
तुम्हें धरती पर भेजकर वो कैसे जी पाया है।

बहुत दिनों बाद तेरी महफ़िल में कदम रखा है ,
मगर नजरो से सलामी देने का तेरा अंदाज़ नही बदला |

अब रिहा कर दो अपने "ख्यालो" से मुझे ........!!!
लोग सवाल करने लगे हैं कि कहाँ रहते हो आज कल..!!!!

उम्र इश्क की, ठीक नहीं जवानी तक.... 

गर है सच्चा, तो हो साथ झुर्रियों तलक!!! 

याद आते है तो ज़रा खो लेते हैं...

आँसू आँखो मे उतर आऐ तो ज़रा रो लेते हैं

नींद आँखो मे आती नहीं लेकीन..

आप ख्वाबो में आऐं यही सोच कर सो लेते हैं

जगा दिया याद-ए-उल्फत ने वरना.....
आज इतवार था....बहुत देर तक सोते हम !!

जब रूह में उतर जाता है, बेपनाह इश्क़ का समंदर.... 

लोग जिंदा तो होते हैं, मगर किसी की रूह के अन्दर!!!

इतना भी मुश्किल नही जमाने को हरा पाना...
 बस सच्ची सी मोहब्बत हो और पाक़ सा इरादा।।

यूँ उन्होंने जो हम को बेवफ़ा कहा, 
इश्क़ उन्हें भी है हमको यक़ीन आगया!

चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो,
सांसों में मेरी खुशबु बन के बिखर जाते हो,
कुछ यूँ चला है तेरे ‘इश्क’ का जादू,
सोते-जागते तुम ही तुम नज़र आते हो।

तेरे रिश्तों में इतनी मिलावट क्यों है ज़िन्दगी,

यहाँ अपना होकर भी कोई अपनों सा नहीं रहता..!!

मिल जाएगा हमे भी कोई टूट के चाहने वाला,

अब शहर का शहर तो बेवफा नही हो सकता...!!!

देखकर हैरान हूँ मै, आईने का ये जिगर.... 

एक तो कातिल निगाहें, उस पे काजल का कहर!!

कसूर मेरा था तोह , कसूर उनका भी था

नज़र हमने जो उठाई थी तोह झुका वो भी सकते थे....

यू निगाहों से निगाहे न मिलाओ,,,
जरा सी शरारत हो गई तो  महोब्बत हो जाएगी

जागना भी कबूल हैं तेरी यादों में रात भर,

तेरे एहसासों में जो सुकून है वो नींद में कहाँ.

दामन फैलाये बैठे हैं अलफ़ाज-ए-दुआ कुछ याद नही...

गर माँगू भी तो क्या माँगू अब उसके सिवा कुछ याद नहीं !!!

जब कभी टूट कर बिखरो तो बताना हमको,
हम तुम्हें रेत के जर्रों से भी चुन सकते हैं।

माफ़ करना ऐ ज़िंदगी, तुझे जी नहीं पा रहे.....

तुझको बेहतर बनाने की कोशिश में, तुझे ही वक़्त नहीं दे पा रहे......

किस्मत वालों को ही मिलती है पनाह मेरे दिल में,
यूँ ही हर शक्स को जन्नत का पता नहीं मिलता!!!!!

आवश्यकता है.....​
​एक ऐसे शख्स की !!!​
​जो 'जैसा' दिखता हो....​
​'वैसा' ही हो...!​

दोहरा किरदार जी नहीं पाता हूँ..... 
इसलिए अक्सर तन्हा नज़र आता हूँ!!! 

आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की,

हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की।

उड़ने दो रंगो को इस बेरंग ज़िंदगी में एक.....

त्यौहार ही तो है जो हमें रंगीन बनाते हैं

काश…!! एक खवाहिश पूरी हो इबादत के बगैर, वो आ कर गले लगा ले मेरी इजाजत के बगैर..

नज़रे करम मुझ पर इतना न कर..
कि तेरी मोहब्बत के लिए बागी हो जाऊं
मुझे इतना न पिला इश्क-ए-जाम की,
मैं इश्क़ के जहर का आदी हो जाऊं।

एक उम्र गुस्ताखियों के लिये भी नसीब हो...
ये ज़िंदगी तो बस अदब में ही गुज़र गई..!

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