♥ Love Shayari ♥

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जब से देखा है तेरी आँखों मे झाक कर,
कोई भी आईना अच्छा नहीं लगता,
तेरी मोहब्बत मे ऐसे हुए हैं दीवानें,
तुम्हें कोई और देखें अच्छा नहीं लगता।

मुस्कुरा के उसने जो देखा मेरी तरफ़ ..
 
इस ज़रा सी बात पर फिर जीना पड़ा मुझे!!

मेरे बाद भी बारिशों को शिकायतें ना हो तुमसे.....

तुम यूँ ही भीगने की ख्वाहिशें रखना...

दिल के राज़ पहुँच गये ग़ैरों तक,

अपनो से बस मशवरा किया था.!!

एक चाहत है तुम्हारे साथ जीने की
वरना पता तो हमे भी है मरना अकेले ही है

तमन्नाओ से खेल रहा है दिल,,,,,
जीत मुमकिन नही,,,,,
और हार मंजूर नही,....

आधा इश्क़ और आधे तुम 

मेरे हिस्से बस बेचैनियां है

भूल जाने की कोशिशें तो खूब की थी मगर, याद तुम आते रहें भूलते भूलते.......

संगरेज़ो(stone) को हमने ख़ुदा कर ही दिया, आखरिश(at the end) रात-दिन पूजते पूजते!!!!

शायद किसी लकीर में मैं 
           भी मिल जाऊ 

 मुझे कुछ क़रीब से देखने दे
           ना हथेली तेरी

इश्क़ होना जरुरी है ....
शायरी के लिए...
अगर कलम ही लिखती तो..
हर दुकानदार शायर होता..!!

तुमने तीर चलाया तो कोई बात न थी,
ज़ख्म मैंने जो दिखाया तो बुरा मान गए…

सारा करिश्मा मोहब्बत का है,
वरना कौन पत्थर की दीवारों को 
ताजमहल कहता है !!

उँगलियाँ ही निभा रही हैं 
     मोबाइल पे रिश्तों को
     आजकल..

  ज़ुबाँ को अब निभाने में    
   बड़ी तक़लीफ़ होती है !

   सब टच में बिजी है..

   भले ही टच में कोई न हो !

नादान थे तो दोस्त थे.
     जवान हुए तो 
     हिन्दू-मुस्लिम 
        बन गए.
______
      - गुलज़ार

इतना भी आसान नहीं होता अपने ढंग से ज़िंदगी जी पाना...

बहुतों को खटकने लगते हैं, जब हम खुद को जीने लगते हैं...

मुकम्मल सी लगती है मेरी शायरी,
लफ्ज जब मेरे होते हैं और जिक्र तेरा...

हर मर्ज़ का इलाज नहीं दवाख़ाने में,
कुछ दर्द चले जाते है सिर्फ़ मुस्कुराने में !!

ऐसे माहौल में क्या दवा और दुआ क्या...... 
जहाँ कातिल ही खुद पूछे कि हुआ क्या!!! 

बहुत आएँगे तुम्हारी जिन्दगी 
मे दिलचस्प लोग,

पर भुला ना पाओगे हमारे 
साथ गुजरे हुए दो पल..

तेरे पास भी कम नही मेरे पास भी बहूत है,
ये परेशानियां आजकल ..फुरसत मे बहूत है..॥

हम तो नरम पत्तों की शाख़ हुआ करते थे,
छीले इतने गए कि खंज़र हो गए

दर्द आँखों से निकला, तो सब ने बोला कायर है.... 

दर्द अल्फ़ाज़ में क्या ढला, कहने लगे शायर है!!

जिंदगी है जनाब..... 

  उलझोगे नहीं.... 
           तो सुलझोगे कैसे...

  और बिखरोगे नहीं.... 
            तो निखरोगे कैसे....

सीखना है तो अपनी माँ से सीखो
ऐ शायरों........

जो दर्द भी सेह लेती है
और लिखती भी नहीं..

वफ़ा सबको मिली दुनिया 
          में हमारे सिवा
 हमें जब भी प्यार हुआ बेकदरों
                 से हुआ

तकलीफ़ ये नहीं,के तुम्हें अज़ीज़ कोई और है,

दर्द तब हुआ,जब हम नज़रअन्दाज़ किए गए ..

हक़ीक़त जान लो जुदा होने से पहले, 
मेरी सुन लो अपनी सुनाने से पहले, 
ये सोच लेना भूलने से पहले, 
बहुत रोई हैं ये आँखें मुस्कुराने से पहले.

ये इश्क भी एक अजीब एहसास होता है…
अल्ज़फों से ज्यादा निगाहोसे बया होता है…

प्यार कहो तो दो ढाई लफज़, मानो तो बन्दगी ,
सोचो तो गहरा सागर,डूबो तो ज़िन्दगी ,
करो तो आसान ,निभाओ तो मुश्किल ,
बिखरे तो सारा जहाँ ,और सिमटे तो ” तुम “

कुछ राज बने ही नहीं होते हैं बांटने के लिए..... 

कुछ सफ़र होते हैं सिर्फ़ तन्हा काटने के लिए!!

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