♥ Love Shayari ♥

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सफ़र आख़िरी है के हम फ़िर ना मिलेंगे,
ये ग़म, ये उदासियाँ, नाज़ ओ नख़रे
भुला के आ सको तो आ जाना,

गुफ़्तगू तो उनसे रोज़ होती है........
मुद्दतों से सामना नही होता!!!!!

यूँ बेहिसाब वफ़ा ना कर किसी से यूं मदहोश हो कर.......
मुसलसल रिवाज़ है कि एक ख़ता के बदले सारी वफ़ाएं भुला देते हैं लोग!!!

मदहोश ना कर मुझे अपना चेहरा दिखा कर...
मोहब्बत अगर चेहरे से होती तो खुदा दिल नही बनाता..!!

जब बेअसर होने लगें मन्नतों के धागे.... 

तो समझो इम्तिहान कोई है आगे!!!

आपको मुफ़्त में जो मिल गये हम,
आप क़दर ना करें ये आपका हक़ बनता है….....

मेरे बाद भी बारिशों को शिकायतें ना हो तुमसे.....

तुम यूँ ही भीगने की ख्वाहिशें रखना...

उसने तारीफ़ ही कुछ इस अंदाज से की मेरी  कि.........

अपनी ही तस्वीर को सौ बार देखा मैंने !!!!!!

अब रिहा कर दो अपने "ख्यालो" से मुझे ........!!!
लोग सवाल करने लगे हैं कि कहाँ रहते हो आज कल..!!!!

मोहब्बत किससे कब हो जाए अंदाजा नहीं होता,

ये वो घर है जिसका कोई दरवाजा नहीं होता

कितनी कातिल है आरजू जिदंगी की..

मर जाते हैं लोग किसी के साथ जीने के लिये!!!

खुश किस्मत‬ होते है ‪‎वो‬ जो ‪तलाश बनते‬ है ‪किसी की‬, 

वरना ‪‎पसंद‬ तो ‪‎कोई‬ भी ‪‎किसी को‬ भी ‪कर लेता‬ है...!!!

किसी को बताना न की भुला दिया तुमने !
हम तो लोगों से यही कहते हैं की तुम मसरूफ बहुत हो !!

तुमने भी तो कोशिश नहीं की मुझे समझने की,

वरना वजह कोई नहीं थी तेरे और मेरे उलझने की !!

जख्म रहे ताजा बस निशां गुम हो गये,
हम आज भी हैं इश्क में,वो किसी के हो गये।

टूटे हुए काच की तरह 
चकनाचूर हो गया,
किसी को लग न जाऊ
इसलिए सबसे दूर हो गया...!!

नज़रे करम मुझ पर इतना न कर..
कि तेरी मोहब्बत के लिए बागी हो जाऊं
मुझे इतना न पिला इश्क-ए-जाम की,
मैं इश्क़ के जहर का आदी हो जाऊं।

ना मस्जिद की बात हो , न शिवालों की बात हो ,
प्रजा बेरोज़गार है , पहले निवालों की बात हो !!
मेरी नींद को दिक्कत ना भजन से है, ना अज़ान से है,
दिक्कत मरते हुये जवान और खुदकुशी करते किसान से है..!!

ज़ुबानी.....इबादत ही काफ़ी नहीं....

ख़ुदा सुन रहा है....खयालात भी...

बहुत दिनों बाद तेरी महफ़िल में कदम रखा है ,
मगर नजरो से सलामी देने का तेरा अंदाज़ नही बदला |

चलो जाने भी दो क्या करोगे मेरा गमे -ए -दास्ता सुनकर,
खामोशी आप समझोगे नहीं, बया हमसे होगा नहीं ..!!

मोहब्ब्त में हुए बर्बाद तो शायरों में मेरा नाम आया,

तेरा दिया हुआ दर्द देख मेरे कितना काम आया

शेर-ओ-सुखन क्या कोई बच्चों का खेल है..... 

जल जाती हैं जवानियाँ, लफ़्ज़ों की आग में!!!

शिकवा  करने गये थे, पर इबादत  सी हो गई...

जिद थी उसे भुलाने की, मगर उसकी आदत सी हो गई!!!
 

"समेट कर ले जाओ अपने झूठे वादों के अधूरे क़िस्से;
अगली मोहब्बत में तुम्हें फिर इनकी ज़रूरत पड़ेगी।

"क्या लिखूँ , अपनी जिंदगी के बारे में. दोस्तों.

वो लोग ही बिछड़ गए. 'जो जिंदगी हुआ करते थे !!

कोई मिला नहीं तुम जैसा आज तक,...

पर ये सितम अलग है कि मिले तुम भी नही..!!

दर्द सहने की अब कुछ यूं आदत सी हो गई है.. 

गर कोई दर्द न मिले तो दर्द सा होता है!! 

कुछ अनकहे लफ़्ज़........ 
बहुत शोर करते हैं रिश्ते टूटने से पहले...... 
कभी शिकायत... 
कभी झगड़ा.. 
कभी रुठना... 
कभी मनाना..... 
कभी कोई गीत.. 
कभी कोई गजल.. 
कभी कोई शेर.... 
कभी कोई शायरी........ 
पर बेहिसाब लापरवाहियां उन्हें फिर अहिस्ता अहिस्ता खामोश ही कर देती है......... 
हमेशा के लिए.....
फिर न कोई शिकायत बाकी रहती है...... 
न कोई आवाज....... 
मीलों तक फैली रहती है तो...... 
सिर्फ़ एक तल्ख खामोशी !!!!!!

गैर मुकम्मल सी ज़िन्दगी, वक्त की बेतहाशा रफ्तार.......

रात इकाई, नींद दहाई, ख्वाब सैंकड़ा और दर्द हज़ार....

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