♥ Love Shayari ♥

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जख्म हैं कि दिखते नहीं..!!
मगर ये मत समझिये कि दुखते नहीं..!!!

कश्ती के मुसाफिर ने समन्दर नहीं देखा,
आँखों को देखा पर दिल मे उतर कर नहीं देखा,
पत्थर समझते है मेरे चाहने वाले मुझे,
हम तो मोम है किसी ने छूकर नहीं देखा।

तुझे चाहा भी तो इजहार न कर सके,
कट गई उम्र किसी से प्यार न कर सके,
तुने माँगा भी तो अपनी जुदाई मांगी,
और हम थे की इंकार न कर सके।

मिल जाये मुझे सब कुछ
कोई ये दुआ देकर चला गया,,,,,,

और 

मुझे बस वो चाहिए था
जो ये दुआ देकर चला गया...!!!

तुमसे मिलकर जाने किस गुमान में हूँ मैं…
तुमसे मिलकर जाने किस गुमान में हूँ मैं…
देखो भूल गया सब पते-ठिकाने… आसमान में हूँ मैं…

आज बस..
तू सामने बैठ,
मुझे तेरा दिदार करने दे..!!
बातें तो हम खुद से भी कर लेंगे..!!

देखकर दर्द किसी का,
जो आह निकल जाती है...

बस इतनी सी बात,
हमें इन्सान बना जाती है!!

नज़र झुका के जब भी वो गुजरे हैं करीब से,
हम ने समझ लिया कि आदाब अर्ज़ हो गया..

वक़्त कम मिला साथ 
वक़्त बिताने को....!!
फिर एक जन्म लेंगे तुमसे
मुकम्मल इश्क़ फरमाने को....!!

रंगों से सीखा,,

गर निखरना है तो बिखरना ही पड़ता है.।

इंनसानियत तो मेने ब्लड बैंक में देखी,

ऐ दोस्त

लहू की बोतल पर जाति का लेबल नहीं होता।

गुफ़्तगू तो उनसे रोज़ होती है........
मुद्दतों से सामना नही होता!!!!!

क़ब्रों में नहीं, हमें किताबों में उतारो,
फ़िलहाल ज़िन्दा हैं हम लोग,
सिर्फ़ मोहब्बत की कहानी में मरे हैं,

एक साँस सबके हिस्से से हर पल घट जाती है,...

कोई जी लेता है जिंदगी किसी की कट जाती है।..

बाबा फरीद कहते हैं

कागा सब तन खाइयो, मेरा चुन-चुन मांस।
दो नैना मत खाइयो, मोहि पिया मिलन की आस॥

ये इश्क भी एक अजीब एहसास होता है…
अल्ज़फों से ज्यादा निगाहोसे बया होता है…

आ थक के कभी पास मेरे बैठ तो हमदम
तू ख़ुद को मुसाफ़िर मुझे दीवार समझ ले,,,

मौसम ए इश्क परवान है, जिंदगी में नई कहानी बन के आ.... 

भिगो दे जो मेरी रूह को, ऐसी बूँद, ऐसा पानी बन के आ!! 

"काश"..... कुछ जिम्मा तुम भी उठा लेते.... 

टूटने से ना सही बिखरने से ही बचा लेते!!

मै खुश हू कि उनकी नफ़रत का इकलौता वारिस हूँ....
वरना मोहब्बत तो उन्हें कई लोगो से रही होगी!!!!!

किस तरहा से दूँ हिसाब में अपनी मोहब्बत का,
तुझसे प्यार किया था व्यापार तो नही किया था...

कौन कहता कि….
बचपन वापस नहीं आता…….

दो घड़ी
माँ के पास तो बैठ कर देखो…,

यूँ बेहिसाब वफ़ा ना कर किसी से यूं मदहोश हो कर.......
मुसलसल रिवाज़ है कि एक ख़ता के बदले सारी वफ़ाएं भुला देते हैं लोग!!!

हमें कोई ना 
पहचान पाया करीब से,

कुछ अंधे थे...
कुछ अंधेरों में थे...

झुकने से गर रिश्ता गहरा हो, तो झुक जाना चाहिए......

हर बार आपको ही झुकना पड़े, तो रुक जाना चाहिए!!

सुनो उदास नहीं होना क्योंकि मैं साथ हूँ सामने न सही पर आस-पास हूँ..!
पल्को को बंद कर जब भी दिल में देखोगे मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ..!!

अजीब ही नज़ारा है इस बदलती दुनिया का

लोग सब कुछ बटोरते हैं खाली हाथ जाने को

एक तुम...और एक वक़्त...अफ़सोस... दोनो ही बदल गये !!!

एक परवाह ही बताती है कि ख़्याल कितना है....
वरना कोई तराजू नहीं होता रिश्तो में!!!!!!!

वो थी, वो हे, और वो ही हमेशा रहेगी,
जब दिल एक हे तो,‪
‎दिल में रहेने वाली भी तो एक ही होगी..

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