♥ Love Shayari ♥

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कभी तुम मुझे अपना तो कभी गैर कहते गये,,,,

देखो मेरी नादानी, हम सिर्फ तुम्हे अपना कहते गये.....!

आँखे खोलू तो चेहरा सामने तुम्हारा हो,
बंद करू तो सपना तुम्हारा हो,
मर जाऊ तो भी कोई गम नही,
अगर खफन के बदले आँचल तुम्हारा हो!

वो बैठे है इस चाह में, कि हम उनको "मांगें उनसे''''.... 

 हम इस गुरुर में,  कि अपनी ही चीज़ क्यू ""मांगें किसीसे""!!!

ये आँखें हैं जो तुम्हारी,
किसी ग़ज़ल की तरह खूबसूरत हैं….
कोई पढ़ ले इन्हें अगर इक दफ़ा तो शायर हो जाए…!!

हवाओं की भी अपनी अजब सियासतें हैं साहब। 

कहीं बुझी राख भड़का दे तो कहीं जलते चिराग बुझा दे।।

तेरी किताब के हर्फ़े, समझ नहीं आते।
ऐ ज़िन्दगी तेरे फ़लसफ़े, समझ नहीं आते।।

कितने पन्नें हैं, किसको संभाल कर रखूँ।
और कौन से फाड़ दूँ सफ़हे, समझ नहीं आते।।

चौंकाया है ज़िन्दगी, यूँ हर मोड़ पर तुमने।
बाक़ी कितने हैं शगूफे, समझ नहीं आते।।

हम तो ग़म में भी, ठहाके लगाया करते थे।
अब आलम ये है, कि.. लतीफे समझ नहीं आते।।

तेरा शुकराना, जो हर नेमत से नवाज़ा मुझको।
पर जाने क्यों अब तेरे तोहफ़े, समझ नहीं आते।।

जिधर से  गुजरो, मीठी सी एक हलचल मचा दो.... 

हर दौर मज़ेदार है उम्र का,  बस उसका मज़ा लो!!

दिल ने आज फिर तेरे दीदार की ख्वाहिश रखी है
अगर फुरसत मिले
तो ख्वाबों मे आ जाना…..!!

झट से बदल दूं, इतनी न हैसियत न आदत है मेरी..
रिश्ते हों या लिबास, मैं बरसों चलाता हूँ..

ऐ इश्क!!
तेरा वकील बनके बुरा किया मैंने

यहां हर शायर तेरे खिलाफ सबूत लिए बैठा है

किस तरहा से दूँ हिसाब में अपनी मोहब्बत का,
तुझसे प्यार किया था व्यापार तो नही किया था...

तप कर गमों की आग में कुंदन बने हैं हम;

खुशबू उड़ा रहा दिल चंदन से सने हैं हम;

रब का पयाम ले कर अंबर पे छा गए;

बिखरा रहे खुशी जग बादल घने हैं हम;

सच की पकड़ के बाँह ही चलते रहे सदा;

कितने बने रकीब हैं फ़िर भी तने हैं हम;

छुप कर करो न घात रे बाली नहीं हूँ मैं;

हमला करो कि अस्त्र बिना सामने हैं हम;

खोये किसी की याद में मदहोश है किया;

छेड़ो न साज़ दिल के हुए अनमने हैं हम

ना देखो मेरी झुर्रियों को इस तरह ताज्जूब से,
लगाये हैं उम्र ने बरसों मेरा ये सिंगार करने में।

उल्फत बदल गई, कभी नियत बदल गई
खुदगर्ज जब हुए, तो फिर सीरत बदल गई
अपना कुसूर, दूसरों के सर पर डाल कर
कुछ लोग सोचते हैं, हकीकत बदल गई..!!

नशा था उनके प्यार का , जिसमें हम खो गए ,
उन्हें भी पता नहीं चला कि कब हम उनके हो गए।

ढूँढ़ने चले थे एक शख्स की मोहब्बत,

खुद को ही खो दिया उसकी चाहत में !

हम भी मुस्कुराते थे कभी,
बेपरवाह अंदाज़ में.... 

देखा है खुद को आज, 
एक पुरानी तस्वीर में !!!

रूठी जो जिदंगी तो मना लेंगे हम,
मिले जो गम वो सह लेंगे हम,
बस आप रहना हमेशा साथ हमारे तो,
निकलते हुए आंसूओ में भी मुस्कुरा लेंगे हम।

इश्क़ होना जरुरी है ....
शायरी के लिए...
अगर कलम ही लिखती तो..
हर दुकानदार शायर होता..!!

जुल्फें देखी हैं या इन नज़रों ने घटा देखी है...
लुट गया जिसने भी तेरी ये अदा देखी है...

अपने इस चेहरे को अब हम से ना छुपाना...
मुद्दतों बाद इस मरीज़ ने दवा देखी है!!

नारी त्याग की मूरत है, तो,
पुरुष संघर्ष की सुरत है,

कैसे कहूँ, महान किसी को
दोनों को एक दूसरे की जरूरत है...

अब तुझे रोज न सोचूं तो बदन टूटता है फराज़,

  एक उम्र हो चली है तेरी याद का नशा करते करते........!!!!

तुझ से मेरी दूरी इतनी... 

मृग में बसी कस्तूरी जितनी!! 

वो थी, वो हे, और वो ही हमेशा रहेगी,
जब दिल एक हे तो,‪
‎दिल में रहेने वाली भी तो एक ही होगी..

सुना है हर बात का जवाब रखते हो तुम...

क्या ..तन्हाई ...का भी इलाज रखते हो तुम.......,

आधा इश्क़ और आधे तुम 

मेरे हिस्से बस बेचैनियां है

झूठ कहते हैं कि संगत का हो जाता है असर..... 

काँटों को तो आज तक महकने का सलीका ना आया...!!

दिल की दहलीज़ पे यादों के दीये रखै हैं
आज तक हमने ये दरवाज़ें खुले रखै हैं


हम पे जो गुज़री, ना बताया, ना बतायेंगे कभी......
कितने ही ख़त अब भी तेरे नाम लिखे रखें है!!!!!!

सम्भल कर किया करो लोगो से बुराई 'मेरी'
तुम्हारे तमाम अपने ...मेरे ही मुरीद हैं!

दिन तबाही के अब नज़दीक आने लगे हैं... 

मुझे देख कर वो कुछ मुस्कुराने से  लगे हैं!!!

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