उँगलियाँ ही निभा रही हैं 
     मोबाइल पे रिश्तों को
     आजकल..

  ज़ुबाँ को अब निभाने में    
   बड़ी तक़लीफ़ होती है !

   सब टच में बिजी है..

   भले ही टच में कोई न हो !





कितनी ही शिद्दत से निभा लो तुम रिश्ता...
मगर.....
बदलने वाले बदल ही जाते हैं...





मत पहनाओ इन्हें शर्तों का लिबास.....
रिश्ते तो बिंदास ही अच्छे लगते हैं....





एक परवाह ही बताती है कि ख़्याल कितना है....
वरना कोई तराजू नहीं होता रिश्तो में!!!!!!!





कुछ यूँ हो रहा अब , 
रिश्तों का विस्तार...!! 

जितना जिस से मतलब, 
उतना उस से प्यार...!! 





पेड़ हूँ..... 
हर रोज़ गिरते हैं पत्ते मेरे!! 

फिर भी.... 
हवाओं से बदलते नहीं रिश्ते मेरे!!




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