तु दिल से ना जाये तो मैं क्‍या करू,
तु ख्‍यालों से ना जाये तो मैं क्‍या करू,
कहते है ख्‍वावों में होगी मुलाकात उनसे,
पर नींद न आये तो मैं क्‍या करू। 💕





अंजाम की परवाह होती तो,
हम मोहब्बत करना छोड़ देते,
मोहब्बत में तो जिद्द होती है,
और जिद्द के बड़े पक्के हैं हम।





वो खुद पे इतना गुरूर करते हैं,
तो इसमें हैरत की बात नहीं,
जिन्हें हम चाहते हैं,
वो आम हो ही नहीं सकते।





प्यार वो हम को बेपनाह कर गये,
फिर ज़िन्दगी में हम को तन्नहा कर गये,
चाहत थी उनके इश्क में फ़नाह होने की,
पर वो लौट कर आने को भी मना कर गये।





सोचा याद न करके थोड़ा तड़पाऊं उनको,
किसी और का नाम लेकर जलाऊं उनको,
पर चोट लगेगी उनको तो दर्द मुझको ही होगा,
अब ये बताओ किस तरह सताऊं उनको।





एक दिन जब हुआ प्यार का अहसास उन्हें,
वो सारा दिन आकर हमारे पास रोते रहे,
और हम भी इतने खुद गर्ज़ निकले यारों कि,
आँखे बंद कर के कफ़न में सोते रहे।





एक तु तेरी आवाज़ याद आएगी,
तेरी कही हुई हर बात याद आएगी,
दिन ढल जायेगा रात याद आएगी,
हर लम्हा पहली मुलाकात याद आएगी।





दिल को था आपका बेसबरी से इंतजार,
पलके भी थी आपकी एक झलक को बेकरार,
आपके आने से आयी है कुछ ऐसी बहार,
कि दिल बस मांगे आपके लिये खुशियाँ बेशुमार!





हुस्न की इश्क से जब जब बात होती है,
महफिल में उनकी बात से हर बात होती है,
वह कहते रहे कोई बात नहीं हम दोनों में,
पर उनकी कहानी से नई शुरूआत होती है





जब उसकी धुन में रहा करते थे,
हम भी चुप चुप जिया करते थे
लोग आते थे गजल सुंनाने,
हम उसकी बात किया करते थे
घर की दीवार सजाने के खातिर,
हम उसका नाम लिखा करते थे,
कल उसको देख कर याद आया हमे,
हम भी कभी मोहब्बत किया करते थे,
लोग मुझे देख कर उसका नाम लिया करते थे।





कब उनकी पलकों से इज़हार होगा,
दिल के किसी कोने में हमारे लिए प्यार होगा,
गुज़र रही है हर रात उनकी याद में,
कभी तो उनको भी हमारा इंतज़ार होगा।





कब उनकी पलकों से इज़हार होगा,
दिल के किसी कोने में हमारे लिए प्यार होगा,
गुज़र रही है हर रात उनकी याद में,
कभी तो उनको भी हमारा इंतज़ार होगा।





मेरी यादो मे तुम हो, या मुझ मे ही तुम हो,
मेरे खयालो मे तुम हो, या मेरा खयाल ही तुम हो,
दिल मेरा धडक के पूछे, बार बार एक ही बात,
मेरी जान मे तुम हो, या मेरी जान ही तुम हो।





दिल का दर्द एक राज बनकर रह गया,
मेरा भरोसा मजाक बनकर रह गया,
दिल के सोदागरो से दिललगी कर बैठे,
शायद इसीलिए मेरा प्यार इक अल्फाज बनकर रह गया।





प्रश्नोंकी होती है लम्बी कतार ,
इनसे बचकर रहने में' है सार ।।
वरना आस्तिकता की होती हार
नास्तिकता का आता है विकार ।।

अपनों से ही कभी हो जाते दो चार
मुफ्त में बढ़ जाती अपनों से तकरार ।।
खत्म होता फिजूल में दिलों का प्यार
बिन बुलाये मुसीबत आ जाती द्वार ।।

कीजिये ये सच्चाई ''धीर" अब स्वीकार,
रखिये दिल को दिल खुश सदाबहार ।।
दोस्त बनेंगे एक नही दो नही हजार
प्यार भी मिलेगा दुनिया से बेशुमार ।।





कभी इसका दिल रखा
और कभी उसका दिल रखा..!
इसी कशमकश में भूल गए
खुद का दिल कहाँ रखा..?





दरख़्त नीम का हूँ मेरे नाम से तुझे घबराहट होगी,
छाया मीठी ही दूँगा बेशक पत्तों मे कड़वाहट होगी !!





याददाश्त का कमज़ोर होना... 
बुरी बात नहीं है जनाब.... 
बड़े बेचैन रहते है वो लोग... 
जिन्हे हर बात याद रहती है.




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